मेरा 'चौथा खड्डा' नवभारत टाईम्स पर

Printed from Navbharat Times - Breaking news, views. reviews, cricket from across India   चौथा खड्डा 19 Nov 2007, 1446 hrs IST बंता: संता सिंह जी... ये खड्डा किसलिए खोदा जा रहा है?" संता: ओ...कुछ नहीं जी मुझे अमेरिका जाना है ना...इसलिए" बंता: अमेरिका जाना है?" संता: हां जी!.." बंता: अमेरिका जाने के लिए खड्डा खोदना जरूरी है? संता: ओ...कर दी ना तूने अनाड़ियों वाली गल्ल बेवकूफ पासपोर्ट बनवाने के लिए फोटो चाहिए होती है कि नहीं? बंता: फोटो तो चाहिए होती है लेकिन...फोटो...

"ये इंडिया है मेरी जान"

"ये इंडिया है मेरी जान" ***राजीव तनेजा*** "और सुनाएँ शर्मा जी कैसे मिज़ाज़ हैँ आपके?"... "बढिया!...धान की नवीं-नकोर फसल के माफिक एकदम फस्स क्लास"... "गुड...वैरी गुड"..... "लेकिन आपके चेहरे के हाव-भाव....आवाज़ की 'टोन'...'पिच'...'रिदम और 'लय'  तो कुछ और ही धुन गुनगुना रही है"... "क्या?"... "यही कि आपके बैण्ड बजे हुए चौखटे से आपकी पर्सनल लाईफ कुछ डिस्टर्ब्ड सी दिखती प्रतीत हो रही है"... "नहीं!..ऐसी तो कोई बात नहीं है"... "अपनी लाईफ तो एकदम से चकाचक और टनाटन चल रही है"... "अच्छा?".... "शायद!..मेरे ही दिल का वहम हो फिर ये".... "अरे यार!...एक आज्ञाकारी...सुन्दर...सुशील एवं सुघड़ अर्धांगिनी के साथ बोनस स्वरूप चार...

कभी तो माएके जा री बेगम

मुझे मेरे एक मित्र ने ये कविता मेरे मोबाईल में ब्लूटुथ के जरिए फॉरवर्ड की थी।मुझे सुनने में बहुत अच्छी लगी तो मैँने सोचा कि इसे सभी के साथ शेयर करना बेहतर रहेगा।ये कविता दरअसल पंजाबी में है और जिन सज्जन ने इसे लिखा है ..मैँ उनका नाम नहीं जानता।शायद वो पाकिस्तान से हैँ।अपने सभी पढने वालों के फायदे के  लिए मैँने इसका हिन्दी में अनुवाद करने की कोशिश की है। उम्मीद है कि आप सभी को पसन्द आएगी। असली रचियता से साभार सहित फिलहाल मुझे ज्ञान नहीं है कि ऑडियो को ब्लॉग पर कैसे डाला जाता है।जैसे ही मुझे इस बारे में पता चलेगा तो मैँ इसके ऑडियो को भी नैट पे ज़रूर डालूँगा।   राजीव तनेजा     कदी ते पेके जा नी बेगम                        ...

मेरी चौथी कहानी नवभारत टाईम्स पर

  मेरी चौथी कहानी 'अलख निरंजन' को नवभारत टाईम्स ने 'बाबा की माया' के नाम से छापा है।धन्यवाद नवभारत टाईम्स.... Printed from Navbharat Times - Breaking news, views. reviews, cricket from across India     बाबा की माया 16 Sep 2008, 1240 hrs IST,नवभारतटाइम्स.कॉम राजीव "अलख निरंजन! बोल. ..बम....बम चिक बम। अलख निरंजन....टूट जाएं तेरे सारे बंधन" कहकर बाबा ने हुंकारा लगाया और इधर-उधर देखने के बाद मेरे साथ वाली खाली सीट पर आकर बैठ गया। पूरी ट्रेन खाली पड़ी है, लेकिन नहीं,...

"हट ज्या...सुसरी...पाच्छे ने"

"हट ज्या...सुसरी...पाच्छे  ने" ***राजीव तनेजा***                       "बधाई हो".... "किस बात की?"... "अरे!...खुशियाँ मनाओ...खुशियाँ".... "पहले बात का पता तो चले...फिर सोचता हूँ कि खुशी मनानी है या फिर मातम".... "अरे!..मातम मनाएँ हमारे दुश्मन".... "तो क्या लाला रौशनलाल के घर पाँचवी बार फिर लड़का पैदा हुआ है?"... "वो दरअसल.... "लगता है....पिछले जन्म में मोती दान करे थे पट्ठे ने".......
 
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