निकाल इसी बात पै सौ का नोट

***राजीव तनेजा*** “रुक...अबे रुक".... "ज्जी...मैँ?".... "ओर तेरा फूफ्फा?".… "जी...बोलिए"... "बेट्टे!....बोलूँगा तो मैँ जरूर और सुणेगा बी तू जरूर"अपनी मूँछों को ताव दे बैरियर पे खड़ा सिपाही बोला "हाँ जी!...बोलिए"... "के बात?....तैन्ने दीखया कोणी यो गज भर लाम्बा... ठाढा सा(तगड़ा) पूरे अढाई किलो का हाथ?"... "ज्जी....शायद!...म्रेरा ध्यान दूसरी तरफ था"... "वोई तो...निकाल इसी बात पै सौ का नोट"... "सौ का नोट?...वो किसलिए?".... "वो इसलिए मेरे फूफ्फा...के मन्ने आज घर पै बाहमण(ब्राहमण) जीमाणे...

"बम चिकी बम...बम....बम"

***राजीव तनेजा*** "बोल बम चिकी बम चिकी बम...बम....बम" "बम....बम...बम".... "बम....बम...बम"(सम्वेत स्वर)... "परम पूज्य स्वामी श्री श्री 108 सुकर्मानन्द महराज की जय".... "जय".... "जय हो श्री श्री 108 सुकर्मानन्द महराज की"मैँने ज़ोर से जयकारा लगाया और गुरू के चरणॉं में नतमस्तक हो गया "प्रणाम गुरूवर".... "जीते रहो वत्स".... "क्या बात?...कुछ परेशान से दिखाई दे रहे हो".... "क्कुछ खास नहीं महराज"... "कोई ना कोई कष्ट तो तुझे ज़रूर है बच्चा"..... "तुम्हारे माथे पे खिंची हुई आड़ी-तिरछी...

बाबू...समझो इशारे

बाबू...समझो इशारे हार्न पुकारे...पम...पम       ये इंडिया है मेरी जान ट्रैफिक के नियमों का पालन करें... सुरक्षित रहें   ***राजीव तनेजा***...
 
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