अब तक छ्प्पन- राजीव तनेजा

ये स्साला!…कम्प्यूटर भी गज़ब की चीज़ है ....गज़ब की क्या?..बिमारी है स्साला…बिमारी| एक बार इसकी लत पड गयी तो समझो कि..बन्दा गया काम से|कुछ होश ही नहीं रहता किसी बात का..ना काम-धन्धे की चिंता...ना यार-दोस्तों की यारी|यहाँ तक की बीवी-बच्चों के लिये भी टाईम नहीं होता…हर वक्त बस क्म्प्यूटर ही कम्प्यूटर|शुरु-शुरू में तो खाना-पीना तक छूट गया था मेरा इस मरदूद के चक्कर में|जब से ये आया घर में…ना दिन को ही चैन था और ना ही रात को आराम...हर वक़्त बस काम ही काम| अब अपने मुँह से कैसे कहूँ कि क्या काम करता था...

ना कम ना ज्यादा…पूरे चौदह साल- राजीव तनेजा

आज वक़्त नहीं था मेरे पास…सुबह से ही इधर-उधर भागता फिर रहा था मैं…सारे काम मुझे ही तो संभालने थे| मेहमानों का जमघट लग चुका था|उन्हीं की खातिरदारी में ही फंसा हुआ था|खूब रौनक-मेला लगा था...बच्चे उछल कूद रहे थे|मैँ कभी टैंट वाले को तो कभी हलवाई को फोन घुमाए चला जा रहा था| "स्साले!…पता नहीं कहाँ मर गये सब के सब?"… कम्भखत जब से फ्री इनकमिंग का झुनझुना थमाया है इन मुय्ये मोबाईल वालों ने जिसे देखो कान पे टुनटुना लगाए लगाए तमाशबीनी करता फिरता है गली गली…मानो फोन ना हुआ माशूका का लव-लैटर हो गया…जी...

देखते क्या हो?…मारो…स्साली को- राजीव तनेजा

“आ…लौट के आ जा मेरे मीत रे….तुझे मेरे गीत बुलाते हैं"… “क्या बात तनेजा जी…आज बड़े खुश हो…मस्ती में खुशी के गीत गए जा रहे हैं?"… “कान पे झापड़ मारूंगा एक"… “काहे को?”… “मेरी ये रोनी सूरत आपको खुशी और हर्ष की दिखाई दे रही है?”… “अरे!…जब आप इतनी जोर से उचक-उचक के…हिचकोले खा-खा के गाएंगे तो सामने वाला क्या समझेगा?”… “क्या समझेगा?”… “यही कि आप खुश हैं…बहुत खुश".. “बेवाकूफ!…ये…ये मैं तुम्हें खुश दिखाई दे रहा हूँ?”मैं तैश में आ अपने चेहरे की तरफ ऊँगलियाँ...

ओह!…श्श…शिट ट…ट…निकल गई….

***राजीव तनेजा*** “ओह!…श्श…शिट ट…ट…निकल गई”…. चींssssssचींssss…..धडाम…. “अरे!….तनेजा जी…गाड़ी काहे रोक दिए?..इत्ता मजा आ रहा था"… “उधर नहीं गुप्ता जी….इहाँ….सामने देखिये ..बत्ती लाल हो रही है"… “पर हमरी तबियत तो हरी हो रही थी ना?…बेफाल्तू में गाड़ी रोक के सारा मजा किरकिरा कर दिए"…. “अरे!…अपने मज़े के लिए गाड़ी का सत्यानास करेंगे का?…लीजिए…ये दो ठौ रुपिय्या लीजिए और उहाँ…सामने जा के अपना आराम से  निबट के आइये…तुरंत …हम इहाँ….साईड में गाड़ी खड़ी कर के आपका इंतज़ार करता हूँ"… “सामने का है?”…...
 
Copyright © 2009. हँसते रहो All Rights Reserved. | Post RSS | Comments RSS | Design maintain by: Shah Nawaz