अब तक छ्प्पन- राजीव तनेजा
ये स्साला!…कम्प्यूटर भी गज़ब की चीज़ है ....गज़ब की क्या?..बिमारी है स्साला…बिमारी| एक बार इसकी लत पड गयी तो समझो कि..बन्दा गया काम से|कुछ होश ही नहीं रहता किसी बात का..ना काम-धन्धे की चिंता...ना यार-दोस्तों की यारी|यहाँ तक की बीवी-बच्चों के लिये भी टाईम नहीं होता…हर वक्त बस क्म्प्यूटर ही कम्प्यूटर|शुरु-शुरू में तो खाना-पीना तक छूट गया था मेरा इस मरदूद के चक्कर में|जब से ये आया घर में…ना दिन को ही चैन था और ना ही रात को आराम...हर वक़्त बस काम ही काम| अब अपने मुँह से कैसे कहूँ कि क्या काम करता था...