सवाल लहराती…बलखाती डेढ़ सयानी मूँछ का- राजीव तनेजा

  आज घड़ी-घड़ी रह-रह कर मेरे दिल में ये अजब-गजब सा सवाल उमड़ रहा है कि जो कुछ हुआ....क्या वो सही हुआ?…अगर सही नहीं हुआ तो फिर सही क्यों नहीँ हुआ? या फिर अगर यही सही था तो फिर…यही सही क्यों था? उस ऊपर बैठे परम पिता परमात्मा से ऐसी कौन सी जन्मजात दुश्मनी थी मेरी जो मेरे साथ उसने ऐसा भेद भरा बरताव किया?…मुझे लड़की बनाने के बजाय लड़का बना…किस जन्म का बदला  ले रहा है वो नामुराद मुझसे?….अगर लड़की बना..वो मुझे इस दीन-हीन दुनिया में मौज-मस्ती कर…रुलने-भटकने के लिए अकेला छोड़ देता क्या घिस जाता...
 
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