ओ!…मेरा यार बना है दूल्हा- राजीव तनेजा

“ओ!…तुस्सी ते छा गए गुरु…साड्डे दिल नूँ भा गए गुरु…पुच्च…पुच्च…पुच्च"शर्मा जी ने लपक कर एक साथ तीन लार भरे चुम्बन मेरे बाएँ गाल पे जड़ दिए… “हटिये!…हटिये…दूर हटिये..कोई देख लेगा”मैं हडबडा कर बौखलाते हुए  पीछे हट कर बोला…. “ओए!…देख लेगा तो फिर देखता रहे…मुझे किसी का कोई डर नहीं…ये ले…और ले ले…पुच्च..पुच्च…पुच्च"शर्मा जी ने मेरे संभलने से पहले ही तीन-चार चुम्बन मेरे दायें गाल पर और जड़ दिए “प्प…पर मुझे तो है"मैं अपने गीले हो चुके गाल को रुमाल से पोंछते हुए सकपका कर उनसे दूरी बनाने का असफल प्रयास...
 
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