भोगी को क्या भोगना…भोगी मांगे दाम- राजीव तनेजा

“हैलो!…इज इट 9810821361?”… “यैस!… “आप वर्ल्ड फेमस  टैंशन गुरु(Tention Guru) ‘राजीव जी' बोल रहे हैं?”… “जी!…जी…हाँ…मैं वर्ल्ड फेमस टैंशन गुरु(Tention Guru) ‘राजीव' ही बोल रहा हूँ…आप कौन?”… “सर!…मैं पप्पू….पानीपत से"…  “कहिये!…पप्पू जी…कैसे हैं?”… “एकदम बढिया…फर्स्ट क्लास".. “कहिये!…पप्पू जी…मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ".. “सेवा तो सर…मैं आपकी करूँगा पर्सनली…आपसे मिलने के बाद"… “इट्स माय प्लेज़र…मुझे आपसे मिलकर बड़ी खुशी होगी"… “खुशी तो सर…मुझे भी बहुत होगी जब मैं...

सदमें में हूँ…शायद…हमेशा-हमेशा के लिए ब्लोगिंग छोड़ दूँ…या फिर लिखना भी -राजीव तनेजा

   पिछले कुछ दिनों में घटनाक्रम जिस तेज़ी से उठापटक भरा गुज़रा..उसे देख कर एवं महसूस कर सदमें में हूँ| शायद!…हमेशा-हमेशा के लिए ब्लोगिंग छोड़ दूँ…या फिर लिखना भी :-( 30 अप्रैल,2011 की रात को दिल्ली के हिन्दी भवन में हुए भव्य कार्यक्रम के दौरान और उसके बाद के अगले कुछ दिनों में घटनाक्रम ने जिस तेज़ी से अपना रंग गिरगिट की तरह रातोरात बदला..उसे देख कर मन निराश….आशंकित एवं व्यथित है…धर्मसंकट में फँस फैसला नहीं कर पा रहा हूँ कि किस ओर जाऊँ और किस ओर नहीं…दोनों तरफ ही तो अपने हैं..दोस्तों का चेहरा...
 
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