कुम्हलाई कलियाँ- सीमा शर्मा (संपादन)

यह कोई गर्व या खुशी की नहीं बल्कि लानत..मलामत और शर्म की बात है कि भारत जैसे जनसँख्या बहुल देश में, जो कि आबादी के मामले में पूरे विश्व में दूसरा स्थान रखता है, सैक्स को देश..समाज द्वारा एक निकृष्ट.. छुपा कर रखे जाने या हेय दृष्टि से देखी जाने वाली याने के बुरी चीज़ समझा जाता है। इसे एक ऐसा हौव्वा बना कर रखा गया है जिस पर खुलेआम.. खुले मन से बात करना..चर्चा या गुफ्तगू करना तक समाज के स्वयंभू ठेकेदारों द्वारा सही नहीं समझा जाता। हालांकि इन्हीं सब बातों को इन्ही स्वयंभू समाज के ठेकेदारों द्वारा एक...

बलम कलकत्ता- गीताश्री

पुराने ज़माने से ही हमारे समाज में मान्य एवं प्रचलित  पितसत्तात्मक मनोवृति..सोच एवं सत्ता के चलते आदम याने के पुरुष, खुद को अपने शारीरिक बनावट..डील डौल के बल पर हौव्वा याने के स्त्री की बनिस्बत ज़्यादा श्रेष्ठ..ज़्यादा समझदार..ज़्यादा उत्तम..ज़्यादा ताकतवर मानता चला आया है। बदलते समय के साथ सोच में आए परिवर्तन के साथ साथ अब चूंकि साबित हो गया है कि स्त्री किसी भी मामले में पुरुषों से उन्नीस नहीं बल्कि बीस या फिर इक्कीस ही है। शीघ्र ही इस बदलाव का असर जीवन के हर क्षेत्र में दिखने लगा और महिलाएँ...

बारह सवाल- सुरेन्द्र मोहन पाठक

अब भी अगर कभी तथाकथित बुद्धिजीवी साहित्यकारों द्वारा लुगदी साहित्य कह कर नकार दिए जाने वाला साहित्य हमारे सामने अपने, हार्ड (कॉपी) या फिर डिजिटल स्वरूप में आ जाता है तो पुराने दिन..पुराना समय एक बार फिर से नॉस्टेल्जिया के ज़रिए हमारे ज़हन में आ..हमें पुराने दिनों..पुरानी यादों में खो जाने को मजबूर कर देता है। मेन स्ट्रीम के गंभीर साहित्य और उनकी बुद्धिजीविता से भरी साहित्यनुकूल भाषा की बनिस्बत इनके कंटैंट रहस्य..रोमांच एवं रोमांस से भरे हुए आम बोलचाल की भाषा से लैस होते थे। इसलिए आम जनमानस के...

आह्वान- सौरभ कुदेशिया

ईसा पूर्व हज़ारों साल पहले कौरवों और पांडवों के मध्य हुए संघर्ष को आधार बना कर ऋषि वेद व्यास द्वारा उच्चारित एवं गणेश द्वारा लिखी गयी महाभारत अब भी हमें रोमांचित करती है।  तमाम उलट फेरों और रहस्यमयी साजिशों एवं चरित्रों से सुसज्जित इस कहानी के मोहपाश से नए पुराने रचनाकार भी बच नहीं पाए हैं। परिणामतः इस महान ग्रंथ की मूल कहानी पर आधारित कभी कोई फ़िल्म..नाटक..कहानी या उपन्यास समय समय पर हमारे सामने अपने वजूद में आता रहा है।इसी रोमांचक कहानी के कुछ लुप्तप्राय तथ्यों को ले कर सौरभ कुदेशिया हमारे...

खुल्लम खुल्ला- ऋषि कपूर

सफ़ल फिल्मी सितारों की अगर बात करें तो उनकी आने वाली पीढ़ी एक तरह से कह सकते हैं कि..अपने 'मुँह में चाँदी का चम्मच ले कर' पैदा होती है। उन्हें वह सब ऐशोआराम और विलासिता भरा जीवन एक तरह से बिना किसी प्रकार का संघर्ष या जद्दोजहद किए आसानी से तश्तरी में सजा सजाया मिल जाता है। इसी तरह शुरुआती कैरियर के मामले में भी आमतौर पर इन स्टार किड्स को किसी किस्म की दिक्कत या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता कि बड़े नाम वाले उनके पिता.. माँ या किसी अन्य नज़दीकी की वजह से उनकी फिल्मों को कहानी, कास्ट..कॉस्ट्यूम...

नागाओं का रहस्य- अमीश त्रिपाठी

अमीश द्वारा लिखी गयी “शिव रचना त्रयी” का दूसरा उपन्यास “नागाओं का रहस्य” उनके पहले उपन्यास “मेलूहा के मृत्युंजय” की भांति ही बेहद रोचक एवं दिलचस्प है। रहस्य और रोमांच से भरपूर इस उपन्यास में आप कदम कदम पर विस्मित होते हैं, चौंकते हैं, मंद-मंद मुस्कुराते हैं और किसी-किसी पल एकदम से उत्साहित हो तनाव वश अपने शरीर को उत्सुकतापूर्ण ढंग से अकड़ा लेते हैं।इसमें ‘शिव’ के साधारण मनुष्य से ईश्वर बनने की कहानी को बेहद दिलचस्प अंदाज़ से इस प्रकार लिखा गया है कि पढ़ते वक्त आप खुद को एक अलग ही दुनिया में पाते हैं...

ओए!..मास्टर के लौंडे- दीप्ति मित्तल

आज के समय में भी अगर कोई किताब आपको आपके पुराने समय..पुरानी यादों..पुरानी शरारतों..पुरानी कारस्तानियों..पुरानी खुराफातों.. पुरानी बेवकूफियों की तरफ़ ले जाए तो इसमें कोई ताजुब्ब नहीं कि आप नॉस्टेल्जिया के सागर में गोते खाते हुए बरबस मुस्कुरा या फिर खुल कर खिलखिला उठें।ऐसे ही मुस्कुराने..खिलखिलाने के अनेकों मौके ले कर लेखिका दीप्ति मित्तल जी हमारे बीच अपनी पहली किंडल किताब 'ओय!..मास्टर के लौंण्डे' ले कर आयी हैं। इस लघु उपन्यास में कहानी है दो दोस्तों, दीपेश और हरजीत की। उस दीपेश की, जिसका एक सख्तमिज़ाज़...

स्वर्ग का अंतिम उतार- लक्ष्मी शर्मा

अमूमन सनातन धर्म को मानने वाले हर छोटे बड़े प्राणी के मन में कहीं ना कहीं यह इच्छा दबी रहती है कि कम से कम एक बार तो वह चार धाम की तीर्थ यात्रा पर जा कर अपना जन्म ज़रूर सफ़ल कर ले। भले ही इसके लिए वो कोई गांव देहात का पाई पाई जोड़ता ठेठ गरीब..गंवार हो अथवा फैशनेबल शहर का हर कदम पर रईसी झाड़ता कोई जाना माना सेठ हो। ऐसी हो एक यात्रा पर दोस्तों..आज मैं आपको ले चल रहा हूँ प्रसिद्ध लेखिका लक्ष्मी शर्मा जी के उपन्यास 'स्वर्ग का अंतिम उतार' के साथ। इस उपन्यास में कहानी है इन्दौर शहर के जाने माने रईस...
 
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