उंगलियाँ - मेघ राठी

मृत्य के बाद के जीवन को लेकर विभिन्न लोगों के बीच भिन्न-भिन्न मत या भ्रांतियाँ हैं। कुछ का कहना है कि मृत्यु की प्राप्ति अगर शांतिपूर्वक ढंग से ना हुई हो या मरते वक्त कोई अथवा कुछ इच्छाएँ अधूरी रह जाएँ तो आत्मा/रूह को मुक्ति नहीं मिल पाती है और वो तब तक इस संसार में भटकती रहती हैं जब तक कि उनकी वे मनवांछित इच्छाएँ पूरी नहीं हो जाती। इन्हीं भटकती आत्माओं के डर के आगे बहुतों ने भयभीत हो घुटने टेक दिए तो इनसे निजात दिलाने के नाम पर कईयों ने तंत्र-मंत्र के ज़रिए इन आत्माओं साधने का दावा किया...
 
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