काग़ज़ के फूल - संजीव गंगवार

ज़िंदा रहा तो मिली गालियाँमरने के बाद मिली  तालियाँदोस्तों... जाने क्या सोचकर यह टू लाइनर आज से कुछ वर्ष पहले ऐसे ही किसी धुन में लिख दिया था मगर अब अचानक यह मेरे सामने इस रूप में फ़िर सामने आ जाएगा, कभी सोचा नहीं था। तब भी शायद यही बात ज़ेहन में थी कि बहुत से लोगों के काम को उनके जीते जी वह इज़्ज़त..वह मुकाम..वह हक़ नहीं मिल पाता, जिसके वे असलियत में हक़दार होते हैं। मगर उनके इस दुनिया से रुखसत हो जाने बाद लोगों की चेतना कुछ इस तरह जागृत होती है कि उन्हें उनकी..उनके काम की अहमियत और कीमत का एहसास...

कथाओं का आँगन - पूजा मणि

आप सबने ये पुरानी कहावत सुनी तो होगी ही कि..'सहज पके सो मीठा होय' अर्थात किसी भी चीज़ को परिपक्व होने अर्थात पकने के लिए पर्याप्त समय की ज़रूरत होती है। मगर आजकल के ज़माने में सब्र कहाँ। जल्दबाज़ी के चक्कर में जहाँ एक तरफ़ कैमिकल के प्रयोग से फल कभी ज़्यादा पक कर गल जाता है तो कभी बाहर से पका और भीतर से कच्चा या फ़ीका रह जाता है। तो वहीं दूसरी तरफ़ इस जल्दी से जल्दी और ज़्यादा से ज़्यादा पा लेने की  भेड़चाल से हमारा साहित्यजगत भी अछूता नहीं रह पाया है। इस हफ़ड़ा-धफड़ी (आपाधापी) के आलम में सबको इतनी जल्दी...

ये इश्क़ नहीं आसां - संजीव पालीवाल

लगभग 3 साल पहले कॉलेज के मित्रों के साथ जोधपुर और जैसलमेर घूमने के लिए जाने का प्रोग्राम बना। जहाँ अन्य दर्शनीय स्थानों के साथ-साथ जैसलमेर के शापित कहे जाने वाले गाँव कुलधरा को भो देखने का मौका मिला। लोक कथाओं एवं मान्यताओं के अनुसार जैसलमेर में कुलधरा नाम का एक पालीवाल ब्राह्मणों का गाँव था जो राजस्थान के पाली क्षेत्र से वहाँ आ कर बसे थे। उन्होंने कुलधरा समेत 84 गांवों का निर्माण किया था। कहा जाता है कि 19वीं शताब्दी में घटती पानी की आपूर्ति के कारण यह पूरा गाँव नष्ट हो गया।एक अन्य मान्यता ...

ख़्वाबगाह - सूरज प्रकाश

सृष्टि के अन्य जीवों की भांति ही इंसान भी बारिश, तूफ़ान जैसी प्राकृतिक अवस्थाओं से ख़ुद को सुरक्षित रखने के लिए कोई न कोई ऐसी पनाह..ऐसा घर..ऐसा नीड़ चाहता है जहाँ निजता के साथ रहते हुए वह अपनों का अपनापन महसूस कर सके। रिश्तों के स्थायित्व से भरा एक ऐसा घरौंदा जहाँ वह स्वतंत्रता से विचर सके..अपने मन की कह और अपनों की सुन सके। हर इंसान अपनी रुचि, ख्वाहिश एवं हैसियत के हिसाब से अपने सपनों का घर..अपनी ख़्वाबगाह का निर्माण करता है। ख़ास कर के स्त्रियाँ एक ऐसा घर..ऐसी ख़्वाबगाह चाहती हैं जिसे वे अपनी रुचि...
 
Copyright © 2009. हँसते रहो All Rights Reserved. | Post RSS | Comments RSS | Design maintain by: Shah Nawaz