"मेरी प्रेम कहानी-मेड फॉर ईच अदर"

"मेरी प्रेम कहानी-मेड फॉर ईच अदर" ***राजीव तनेजा*** "हैलो"... "मे आई स्पीक टू मिस्टर राजीव तनेजा?" "यैस!...स्पीकिंग" "सर!..मैँ 'रिया' बोल रही हूँ 'फ्लाना एण्ड ढीमका' बैंक से"  "हाँ जी!...बोलिए"  "सर!...वी आर प्रोवाईडिंग होम लोन ऐट वैरी रीज़नेबल रेटस"  "सॉरी मैडम!..आई एम नाट इंटरैस्टिड"  "सर!...बहुत अच्छी स्कीम दे रही हूँ आपको"...  "हाँ जी!...बताएँ"... "सर!..हम आपको बहुत ही कम ब्याज पे लोन प्रोवाईड कराएँगे"...  "अभी कहा  ना आपको...कि नहीं चाहिए"... "सर!...पहले...

महिमा मंडन एक ग्राम सेवक का

  "महिमा मंडन-एक ग्राम सेवक का" भारत किसानों का..खेत-खलिहानों का देश है।हमारे देश की 70% से ज़्यादा आबादी खेती पर निर्भर है।ज़ाहिर है कि जब इतने ज़्यादा लोग एक ही काम में....एक ही मकसद में जुटे होंगे तो उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना भी करना पड़ता होगा।लेकिन राई के दाने बराबर छोटी मुश्किलों को पहाड़ बराबर बताने का हुनर तो कोई इन भोले किसानों से सीखे।मेरे ख्याल से तो ये बेकार की ड्रामेबाज़ी सबका ध्यान अपनी तरफ खींचने की कवायद भर ही है क्योंकि.. जहाँ एक तरफ किसान रोना रोते हैँ खेतो में बिजली ना होने का.... तो यहाँ शहर में ही कौन सा हरदम लट्टू(बल्ब)चमचमियाते रहते हैँ?लाईट जैसी वहाँ जाती है..ठीक वैसी ही यहाँ भी जाती...

"व्यथा-बिचौलियों की"

"व्यथा-बिचौलियों की"   ***राजीव तनेजा*** मैँ भगवान को हाज़िर नाज़िर मान आज अपने पूर्ण होशोवास तथा  सही मानसिक संतुलन में अपने तमाम साथियों कि ओर से ये खुलेआम ऐलान करता हूँ कि मैँ एक बिचौलिया हूँ और लोगों के रुके काम...बिगड़े काम बनवा...पैसा कमाना हमारी  हॉबी...हमारा पेशा...हमारी फितरत है।ये कहने में हमें  किसी भी प्रकार का कोई संकोच..कोई ग्लानि या कोई शर्म नहीं कि ...कई बार अपने निहित स्वार्थों के चलते हम पहले दूसरों के बनते काम बिगड़वाते हैँ और बाद में अपना टैलैंट...अपना हुनर...

व्यथा-एक कहानी चोर की

***राजीव तनेजा*** हाँ!..मैँ चोर हूँ..एक कहानी चोर।अपने बिज़ी शैड्यूल के चलते इतना वक्त नहीं है मेरे पास कि मैँ आप जैसे वेल्लों के माफिक बैठ के रात-रात भर कहानियाँ या आर्टिकल लिखता फिरूँ।इसलिए अगर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मैँने कॉपी-पेस्ट का सिम्पल और सीधा-सरल रास्ता अख्तियार  कर लिया तो कौन सा गुनाह किया? फॉर यूअर काईन्ड इंफार्मेशन!...मैँ सिर्फ उन्हीं लेखों और कहानियों को चुराता हूँ जो मुझे...मेरे दिल को अन्दर तक...भीतर तक छू जाती हैँ।वही कहानियाँ...वही लेख मेरा ध्यान अपनी...

"व्यथा-चालू चिड़िया की"

"व्यथा-चालू चिड़िया की" ***राजीव तनेजा*** "लो कर लो बात..पहले तो आप खुद ही मुझे इस कोर्ट-कचहरी के झमेले में घसीट लाए और अब आपको ही डर लग रहा है कि माननीय अदालत में जज साहिबा के एक महिला होने के कारण आपके साथ इंसाफ नहीं होगा"... "चलो!...मानी आपकी बात कि कभी-कभी हमदर्दी  या फिर जाति भेद के चलते माननीय न्यायधीशों से कुछ गल्तियाँ भी हो जाती हैँ लेकिन ऐसी अनोखी और विरली घटनाएँ तो यदा-कदा सावन के महीने में ही घटा करती हैँ" "बाकि ज़्यादातर केसों में तो पैसो का लँबा-चौड़ा हेर-फेर ही इस सब ...
 
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