"फुल एण्ड फाईनल"
***राजीव तनेजा*** "अरे...तनेजा जी!...ये सब चोट-चाट कैसे लग गई?".... "अब होनी को कौन टाल सकता है....शर्मा जी?".... "फिर भी...पता तो चले कि आखिर हुआ क्या?".... "सब भुट्टा खाने का नतीजा है"... "भुट्टा खाने का?.....मैँ समझा नहीं....ज़रा खुल के बताएँ".... "यार!..मेरी किस्मत ही फूटी थी जो मैँ उस राम प्यारी की बच्ची के पास भुट्टा खाने चला गया"..... "तो क्या उसकी बिटिया इतनी बड़ी और स्यानी हो गई कि खुद अपने बूते पे काम-धन्धा सँभाल सके?"... "कमाल करते हो शर्मा जी आप भी...अभी तो उसके खेलने-कूदने...