ईब्ब मैं के करूँ?...कित्त जाऊँ?

***राजीव तनेजा***
नोट:इस कहानी का विषय और विषयवस्तु कुछ वयस्क टाइप की है...अत: बाद में ये ना कहना कि पहले चेताया नहीं था
"गजब का टैम आ ग्या ईब्ब तो...गजब का"...
"क्या हो गया ताऊ जी?"...
"इस सुसरी...हराम की जणी नै ना जीण जोगा छोड़ेया ओर ना ही मरण जोगा राख्या"...
"क्या बात ताऊ जी?...ये सुबह-सुबह किस पर अपना गुस्सा निकाल रहे हो?"..
"तेरी फूफी पे"...
"क्या मतलब?"...
"वोई तो मैँ बी पूछूँ हूँ"...
"क्या?"...
"तू के 'डी.सी' लाग रेहा सै?...
"क्या मतलब?"...
"छोरी &ं%$#$% के ...वोई तो मैँ बी...