ईब्ब मैं के करूँ?...कित्त जाऊँ?

***राजीव तनेजा*** नोट:इस कहानी का विषय और विषयवस्तु कुछ वयस्क टाइप की है...अत: बाद में ये ना कहना कि पहले चेताया नहीं था "गजब का टैम आ ग्या ईब्ब तो...गजब का"... "क्या हो गया ताऊ जी?"... "इस सुसरी...हराम की जणी नै ना जीण जोगा छोड़ेया ओर ना ही मरण जोगा राख्या"... "क्या बात ताऊ जी?...ये सुबह-सुबह किस पर अपना गुस्सा निकाल रहे हो?".. "तेरी फूफी पे"... "क्या मतलब?"... "वोई तो मैँ बी पूछूँ हूँ"... "क्या?"... "तू के 'डी.सी' लाग रेहा सै?... "क्या मतलब?"... "छोरी &ं%$#$% के ...वोई तो मैँ बी...

मेरी नौवीं कहानी नवभारत टाईम्स पर

पहली कहानी- बताएँ तुझे कैसे होता है बच्चा दूसरी कहानी- बस बन गया डाक्टर तीसरी कहानी- नामर्द हूँ,पर मर्द से बेहतर हूँ चौथी कहानी- बाबा की माया पाँचवी कहानी- व्यथा-झोलाछाप डॉक्टर की छटी कहानी-काश एक बार फिर मिल जाए सैंटा सातवीं कहानी-थमा दो गर मुझे सत्ता आठवी कहानी- मेड फॉर ईच अदर नौवीं कहानी- बतलाने की कृपा करेंगे आप? Navbharat Times - Breaking news, views. reviews, cricket from across India बतलाने की कृपा करेंगे आप? 6 Jan 2010, 1731 hrs IST  राजीव तनेजा मान्यवर नेता जी ,  ...

"अन्धा बाँटे रेवड़ियाँ"

***राजीव तनेजा*** "क्या हुआ?….आते ही ना राम-राम..ना हैलो-हाय...बस..बैग पटका सीधा सोफे पे और तुरन्त जा गिरे पलंग पे...धम्म से...कम से कम हाथ मुँह तो धो लो"..... "अभी नहीं...थोड़ी देर में".. "चाय बनाऊँ?"... "नहीं!...मूड नहीं है".. . "क्या हुआ तुम्हारे मूड को?...जब से आए हो..कुछ परेशान से...थके-थके से...लग रहे हो".. "बस ऐसे ही"... "फिर भी..पता तो चले"... . "कहा ना...कुछ नहीं हुआ है"... "ना..मैँ नहीं मान सकती...आप जैसा मस्तमौला इनसान इस तरह गुमसुम हो के चुपचाप बैठ जाए तो..कुछ ना कुछ गड़बड़...

ब्लागर सम्मेलनों की ऐसी की तैसी

हद हो गई ब्लागर सम्मेलनों की ...कोई यहाँ से बुला रहा है तो कोई वहाँ से पुकार रहा है... इनकी ऐसी की तैसी .... मैं अकेली जान ...किसका घर आबाद करूँ और किसका बंटाधार करूँ?  . और फिर सारे यही कहते हैं की आ जाओ हमारी नगरी..हमारे द्वारे.. पण भैया ई तो पहले तनिक बता दिओ की टिकिट अपने पल्ले से खरीद के आवे के बिना टिकिट ही घोड़े के माफिक हिनहिनाते हुए सरपट दौड़े चले आएं?.. हाँ-हाँ!...सब जानत है हम...आप तो ईहे कहोगे न कि हमरे राज मे टिकिट-फिकेट का कौनु जरूरी नाहीं... आप बस सरपट दौड़े चले आईए ...हम पूछता...
 
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