मेरा खुला पत्र पं.डी.के.शर्मा "वत्स" उर्फ ‘बनवारी लाल’ के नाम
आदरणीय पंडित जी,प्रणाम अभी कुछ घंटे पहले ही फोन पर आपसे सोहाद्रपूर्ण तरीके से बतियाने के बाद आपकी ये ताज़ी पोस्ट बुद्धिमानों का सम्मेलन और बनवारी लाल जी की मन की पीडा अनायास ही पढ़ने को मिली …जान कर अच्छा लगा कि आप तो पूरे किस्सागो टाईप के होते जा रहे हैं…ठीक अपुन के जैसे ही…ज़रा सी बात का बतंगड कैसे बनाया जाता है?…ये भी आपसे सीखने को मिला …उम्मीद है कि मेरे इस पत्र के बाद आपको भी मुझ से काफी कुछ सीखने को मिलेगा| चलिए!…पहले बात करते हैं आपकी उक्त पोस्ट की तो आपकी...