तख्ता पलट दो ससुरों का- राजीव तनेजा "...

***राजीव तनेजा*** ठक...ठक... ठक्क...ठक्क “लगता है स्साला!...ऐसे नहीं खोलेगा....तोड़ दो दरवाज़ा”… "जी!…जनाब"... थाड़......थाड़...धमाक...धमाक(ज़ोर से दरवाज़ा पीटे जाने की आवाज़) "रुकिए …रुकिए …क्कौन है?".. "पुलिस...दरवाज़ा खोलो".... "प्पुलिस?...इतनी रात गए?"... "हाँ!...बेट्टे..पुलिस...तुझ जैसे चोरों को पकड़ने के लिए रात में ही रेड डालनी पड़ती है"... "इंस्पैक्टर साहब...सब कुशल-मँगल तो है ना?"... "हाँ!...कुशल भी है और मँगल भी है...अभी उन्हीं का रिमांड ले के सीधा तेरे पास आ रहे हैँ"... "रिमांड...

हाँ!…मैंने भी ‘बलात्कार' किया है -राजीव तनेजा

हाँ!…मैंने भी ‘बलात्कार' किया…किया है उसका …जो जगत जननी है …जीवन दायनी है…लाखों-करोड़ों की संगिनी है  … खुद मेरी भी  अपनी है … मैं ताकता हूँ हर उस ऊंचाई की तरफ…हर उस उपलब्धि की तरफ …जो मुझे खींच ले जाए लक्ष्मी के…कुबेर के द्वार…पर इसी सनक में भूल जाता हूँ हर बार कि पैर तो नहीं टिके हैं मेरे ज़मी पे इस भी बार…… मैं आप में…आप में और आप में भी हूँ…मैं नायक हूँ तो खलनायक भी मैं ही हूँ…मै नेता हूँ तो अभिनेता भी मैं ही हूँ… छोटे शिशु और बालक से लेकर अभिभावक तक मुझ में समाया है ….. मै अध्यापक...

क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी फितरत छुपी रहे?

***राजीव तनेजा*** "अरे!...गांधी जी...आप?...आप यहाँ कैसे?...प्रणाम स्वीकार करें"... "इधर-उधर क्या देख रहे हैं जनाब?..मैं आप ही से...हाँ-हाँ ...आप ही से बात कर रहा हूँ".... "तो फिर ये ‘गांधी जी’....’गांधी जी’ क्या लगा रखा है?...सीधे-सीधे नाम ले के नहीं बुला सकते?"... "कमाल  है!...अब आप काम ‘गांधी जी’ वाले करेंगे तो आपको गांधी जी के नाम से नहीं तो क्या 'नत्थू राम गोडसे' के नाम से पुकारें?"... “मैंने क्या किया है?”… “ये भी मुझे ही बताना पड़ेगा?”… “मैं कुछ समझा नहीं"… “रहने दीजिए…गुप्ता...

अलविदा ब्लॉग्गिंग - राजीव तनेजा

“चढ गया ऊपर रे…अटरिया पे…अटरिया पे लौटन कबूतर रे"… “गुटर-गुटर…गुटर-गुटर"… “ओह्हो!…दुबे जी आप".. “जी तनेजा जी…मैं"… “कहिए!…कैसे याद किया?”.. “ये मैं क्या सुन रहा हूँ?”… “क्या?”.. “यही कि आपने हमेशा के लिए ब्लॉग्गिंग तो तिलांजलि दे बूढ़े बरगद के नीचे अपना सारा जीवन बिताने का निर्णय लिया है?”… “सारा नहीं..आधा".. “क्या मतलब?”… “आधा तो बीत चुका"… “जी!….बात तो काफी हद तक आपकी सही है कि आधा जीवन तो हमारा बीत चुका लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं हो जाता ना कि हम बाकी के बचे हुए आधे जीवन को भी...
 
Copyright © 2009. हँसते रहो All Rights Reserved. | Post RSS | Comments RSS | Design maintain by: Shah Nawaz