तख्ता पलट दो ससुरों का- राजीव तनेजा "...
***राजीव तनेजा*** ठक...ठक... ठक्क...ठक्क “लगता है स्साला!...ऐसे नहीं खोलेगा....तोड़ दो दरवाज़ा”… "जी!…जनाब"... थाड़......थाड़...धमाक...धमाक(ज़ोर से दरवाज़ा पीटे जाने की आवाज़) "रुकिए …रुकिए …क्कौन है?".. "पुलिस...दरवाज़ा खोलो".... "प्पुलिस?...इतनी रात गए?"... "हाँ!...बेट्टे..पुलिस...तुझ जैसे चोरों को पकड़ने के लिए रात में ही रेड डालनी पड़ती है"... "इंस्पैक्टर साहब...सब कुशल-मँगल तो है ना?"... "हाँ!...कुशल भी है और मँगल भी है...अभी उन्हीं का रिमांड ले के सीधा तेरे पास आ रहे हैँ"... "रिमांड...