मेरा अल्लाह भी तू....मेरा मौला भी तू- राजीव तनेजा

हे!...ऊपरवाले...हे!...परवरदिगार....हे!... कुल देवता...  बहुतों पर उपकार किए हैं तूने...बहुतों को सर चढ़ाया है... कुछ हमारी भी खबर ले... हे!... बहुतों के देवता.....हे!...सैंकड़ों के माई-बाप... सबकी रक्षा तू सदा करता चला आया है... कुछ हमारी भी सोच... तेरे सिवा अब हमारा कोई नहीं... ये आखिर हो क्या रहा है प्रभु हमारे इस देश में?....जगह-जगह धक्के खाने के बाद तीन?....सिर्फ तीन दिन मिले हैं अन्ना को अनशन के लिए?...वो भी पूरी गिन के बाईस शर्तों के साथ?...साथ ही ये हलफनामा देने के लिए कहा जा रहा...

नतीजा फिर भी वही…ठन्न…ठन्न…. गोपाल-राजीव तनेजा

ट्रिंग…ट्रिंग….ट्रिंग…ट्रिंग… “ह्ह….हैलो…श्श….शर्मा जी?”… “हाँ!…जी….बोल रहा हूँ…आप कौन?”… “मैं…संजू”….. “संजू?”….. “जी!….संजू…..पहचाना नहीं?…..राजीव तनेजा की वाईफ"…. “ज्ज…जी भाभी जी….कहिये…क्या हुक्म है मेरे लिए?…..सब खैरियत तो है ना?”… “अरे!…खैरियत होती तो मैं भला इतनी रात को फोन करके आपको परेशान क्यों करती?”…. “अरे!…नहीं…इसमें परेशानी कैसी?…अपने लिए तो दिन-रात…सभी एक बराबर हैं….आप बस…हुक्म कीजिये"…. “तुम कई दिनों से इन्हें छत्तीसगढ़ आने का न्योता दे रहे थे ना?”… “जी!…दे तो रहा था...
 
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