राजनैतिक तुकबन्दियाँ

करारी मात के बाद....अब क्या करेगी कांग्रेस दुम दबा मुँह छुपाएगी या..हालात करेगी फेस सुना था किसी विज्ञापन में कि....चीता भी पीता है केजरीवाल मगर देखो...बिना खाए पिए ही जीता है अपनी इज्ज़त.............................अपने हाथ आप को नहीं चाहिए..कांग्रेस-भाजपा का साथ ना भाजपा से दोस्ती..ना कांग्रेस से यारी अपनी इज्ज़त.................आप को प्यारी ख़ुशी बढ़ कर इससे और बताओ..क्या होगी जब दिल्ली में झाडू और केंद्र में होगा मोदी दिल्ली में झाडू..........केंद्र में मोदी नहीं बैठना..गन्दी कांग्रेस की गोदी साथ अन्ना और किरण का भी होता..तो नज़ारा कुछ और होता सरकार आसानी से अपनी बनती.........मन में नाचता मोर होता जोश..जोश में जोश दिला...

राष्ट्र हित मे आप भी जुड़िये इस मुहिम से ...

 सन 1945 मे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की तथाकथित हवाई दुर्घटना या उनके जापानी सरकार के सहयोग से 1945 के बाद सोवियत रूस मे शरण लेने या बाद मे भारत मे उनके होने के बारे मे हमेशा ही सरकार की ओर से गोलमोल जवाब दिया गया है उन से जुड़ी हुई हर जानकारी को "राष्ट्र हित" का हवाला देते हुये हमेशा ही दबाया गया है ... 'मिशन नेताजी' और इस से जुड़े हुये मशहूर पत्रकार श्री अनुज धर ने काफी बार सरकार से अनुरोध किया है कि तथ्यो को सार्वजनिक किया जाये ताकि भारत की जनता भी अपने महान नेता के बारे मे जान...

चक्रव्यूह फेसबुक का

***राजीव तनेजा*** फेसबुकिया नशा ऐसा नशा है कि एक बार इसकी लत लग गई तो समझो लग गयी...बंदा बावलों की तरह बार बार टपक पड़ता है इसकी साईट पर कि..."जा के देखूँ तो सही मुझे कितने लाईक और कितने कमेन्ट मिले हैं?"... "अरे!...तुझे क्या लड्डू लेने हैं इन लाईक्स और कमैंट्स से जो बार बार फुदक कर पहुँच जाता है फिर से उसी नामुराद ठिकाने पे?"....   "क्या कहा?....दिल नहीं मानता?".... "हुंह!...दिल नहीं मानता....अरे!...अगर दिल की सुनने का इतना ही शौक है तो क्यों नहीं सुनी तब अपने दिल की जब...

FM Rainbow पर मेरी कविता ‘दिल से दिल तक' कार्यक्रम में

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तुकबंदियां मेरे मन की -4

रात कह रही है चुपके से…कानों में मेरे सो जा चुपचाप…बहुत हो लिए ड्रामे तेरे ************************************************** अन्ना रामदेव कर रहे....दिल्ली में मंथन हाथ लगेगा कुछ या..रह जाएँगे ठन ठन ************************************************** भंग और छंग की...तरंग में कूदें..बिना कपड़ों के जंग में ************************************************** इश्क अंधा....भला कहाँ सुनता किसी की जिसकी होती जीत...बजती तूती उसी की **************************************************...

तुकबंदियां मेरे मन की- 3

एक कटता पेड़ बचा.....आज मैंने धरती का क़र्ज़ चुकाया है पड़ोसी मकान ना बना सके..रिपोर्ट कर तभी उसे फँसाया है  ************************************************* कट जाएगा जिंदगी का बचा खुचा सफर सुकुन से बस!.................डरा मत तू मुझे….सख्त क़ानून से ************************************************* चैन मेरा हर पल...…...छिनता रहा वो दाग दामन पे मेरे..गिनता रहा ************************************************* ‎तेरे चन्द कदमो की आहट......मुझे संजीदा करती है किसकी...

तुकबंदियां मेरे मन की–2

कुछ लोग महान पैदा होते हैं.........कुछ पर महानता थोप दी जाती है कुछ चाकुओं से खेलते हैं और…कुछ को जबरन सौंप..तोप दी जाती है ********************************************************** अजीब रिश्ता है मेरा तुमसे और......…...........तन्हाई से दिन में झिझक और..रात में प्यार तुम्हारी बेहय्याई से ********************************************************** जिन्दगी के रंगों ने रोक लिया कदम वर्ना चलते हम अभी और दस कदम ********************************************************** मेरी फितरत में नहीं.......…....अपना गम बयां करना ज़बान अगर खुद फिसल जाए तो..हमको क्या करना ********************************************************** तेरी...

तुकबंदियां मेरे मन की- 1

बिसात इश्क की आज फिर.......................मैंने बिछा दी भाइयों ने उसके रोली चन्दन के साथ अर्थी मेरी सजा दी ************************************************ मर के नाम रौशन किया.....तो क्या किया जिन्दगी भर तरसते रहे..बुढ़ापे में घी पिया ************************************************ सत्ता पे काबिज.........आज मैं हो तो लूँ रुको...पहले हाथ..मुँह..पैर सब धो तो लूँ ************************************************ हिल गई सत्ता........सत्ता के गलियारों की पौ बारह...
 
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