मिलिए ब्लॉगवुड की अबोध बच्चियों से -होली हंगामा स्पेशल

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रूपसियाँ ब्लॉगवुड की-बुरा ना मानों …होली है

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मुझे कच्छा खरीदना है...पर भ्रम में हूँ...कौन सा लूँ?...आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार है

मुझे कच्छा खरीदना है...पर भ्रम में हूँ...कौन सा लूँ?...आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार है ***राजीव तनेजा*** ट्रिंग...ट्रिंग.…. तनेजा जी?... "ओह्हो!..शर्मा जी...आप?…..कहिए…कैसे याद किया?"... "अभी आप क्या कर रहे हैं?"... "कच्छा ठीक कर रहा हूँ"... "क्क...क्या मतलब?…आप कच्छे भी ठीक करते हैं?”… "ठीक करते हैं से क्या मतलब?…मैंने कोई मरम्मत की दुकान थोड़े ही खोल रखी है?”.. “अभी आपने ही तो कहा”…. “क्या?”…. नोट:इस कहानी में पाठकों को कुछ द्विअर्थी संवादों के होने का भान ...

मिलिए ब्लोगवुड की हसीनाओं से-होली हंगामा स्पेशल

नोट:होली के अवसर पर इन चित्रों के महज़ हास्य के लिए बनाया गया है..अगर किसी भी ब्लॉगर मित्र को अपने फोटो पर आपत्ति हो तो सहर्ष ही क्षमा मांगते हुए उसके चित्र को हटा दिया जाएगा                                 नोट:होली के अवसर पर इन चित्रों के महज़ हास्य के लिए बनाया गया है..अगर किसी भी ब्लॉगर मित्र को अपने फोटो पर आपत्ति हो तो सहर्ष ही क्षमा मांगते हुए उसके चित्र को हटा दिया जाएगा...

उड़न तश्तरी जी..ललित शर्मा जी…दिनेश राय द्विवेदी जी ….क्या आपके पास मेरे इन सवालों का जवाब है?

  क्या आप सब के साथ भी वही सब हो रहा है जो मेरे साथ हो रहा है?… क्या आपके….मेरे और तमाम ब्लोग्गरों के ख्याल मिलते-जुलते हैं?…. किसी प्रिय ब्लॉगर को देखने के बाद क्या आपके दिल में भी वैसी ही हुक उठती है जैसी मेरे दिल में उठती है?   "तू ही तू...तू हो तू ....ब्लॉगिंग रे मेरी आरज़ू...मेरी जुस्तजू... तू ही तू...तू ही तू ...ब्लॉगिंग रे" उफ़!..ये क्या होता जा रहा है मुझे?...जहाँ जाता हूँ...ऐ ब्लॉगिंग!...तुझे...
 
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