मेरी बीवी….उसकी बीवी
**राजीव तनेजा***
“ओह्हो…शर्मा आप?..आज ये सूरज अचानक पश्चिम से कैसे निकल पड़ा?…कहिए सब खैरियत तो है?”…
“जी…बिलकुल”….
“तो फिर आज अचानक…यहाँ कैसे?”…
“कैसे क्या?…ये आपके सामने वाले पेट्रोल पम्प से स्कूटर में पेट्रोल भरवा रहा था कि अचानक ख्याल आया कि यहीं सामने वाली बिल्डिंग में ही तो आपका दफ्तर है"…
“ओह!….
“तो मैंने सोचा कि क्यों ना आज दोपहर की चाय अपने तनेजा साहब के साथ…उनके दफ्तर में ही बैठ के पी जाए?"…
“हाँ-हाँ!…क्यों नहीं?…बड़े शौक से लेकिन अभी तो सिर्फ ग्यारह ही बजे हैं"मैं घड़ी की तरफ इशारा करता...