मेरी बीवी….उसकी बीवी

**राजीव तनेजा*** “ओह्हो…शर्मा आप?..आज ये सूरज अचानक पश्चिम से कैसे निकल पड़ा?…कहिए सब खैरियत तो है?”… “जी…बिलकुल”…. “तो फिर आज अचानक…यहाँ कैसे?”… “कैसे क्या?…ये आपके सामने वाले पेट्रोल पम्प से स्कूटर में पेट्रोल भरवा रहा था कि अचानक ख्याल आया कि यहीं सामने वाली बिल्डिंग में ही तो आपका दफ्तर है"… “ओह!…. “तो मैंने सोचा कि क्यों ना आज दोपहर की चाय अपने तनेजा साहब के साथ…उनके दफ्तर में ही बैठ के पी जाए?"… “हाँ-हाँ!…क्यों नहीं?…बड़े शौक से लेकिन अभी तो सिर्फ ग्यारह ही बजे हैं"मैं घड़ी की तरफ इशारा करता...

आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर

अपनी ब्लोगिंग के शुरूआती दिनों में एक ब्लॉग गीत लिखने की कोशिश की थी…मामूली फेर-बदल के बाद उसे आपके सामने पुन: पेश कर रहा हूँ… आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर ***राजीव तनेजा*** आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर...  आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर... सम-समायिक पे तुम लिखो हास्य में व्यंग्य मैँ लाता हूँ  चिट्ठे पे मेरे तुम टिपिआओ तुम्हारे चिट्ठे मैँ टिपियाता हूँ आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर...  आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर... जतन से तुम ये-ये लिखो प्रयत्न से...

खंजर दिल के आर-पार करता है

आज कल ब्लॉगजगत में जो हो रहा है या जो चल रहा है…उसे देख-सुन और पढकर कर अनायास ही ये पंक्तियाँ दिल से निकल पड़ी… आप सबके साथ बांटना चाहूँगा…     कोई सामने से वार करता है कोई छुप के प्रहार करता है तोड़ के भरोसा मेरा हर कोई खंजर दिल के आर-पार करता है  ...

ना कोई खर्चा-पढ़ने को मिलेगी ब्लॉग चर्चा

  लीजिए साहिबान …अब ना कोई झमेला ..ना कोई टंटा…चूंकि आ पहुंची है हम तीन तिलंगों की फ़ौज ले के अपनी नई-नवेली..अनूठी ब्लॉग चर्चा   अब ना कोई लफडा…ना कोई खर्चा…पढ़ने को मिलेगी बस… उम्दा …अनूठी…अलबेली ब्लॉग चर्चा   अब ललित शर्मा जी की दुनाली से होंगे धमाकेदार फायर… यशवंत मेहता करेंगे अपनी लच्छेदार बातों से आप सबको घायल … और फिर हँसते-खिलखिलाते हुए मरहम लगाने के लिए तो…मैं हूँ ना ब्रेकिंग न्यूज़:ब्लॉगजगत पर छाए बुरे ग्रहों को शांत करने के लिए संगीता पुरी जी...

हिंदी ब्लॉगरस - षड्यंत्र या साजिश?

हँसते रहो के फ्रंट डैस्क को अभी-अभी विश्वसनीय सूत्रों के जरिए अपुष्ट खबर मिली है कि देश-विदेश के जाने-माने हिंदी के ब्लॉगर कुछ दिन पहले मुंबई में इकठ्ठा हुए थे| क्या ये एक सोची-समझी साजिश के तहत एक ही मंच पर विराजमान थे?… या फिर इसे महज़ एक संयोग समझा जाए? … मीडियाजगत में इनकी एक साथ उपस्तिथि को लेकर तरह-तरह के कयास लगे जा रहे हैं… क्या नई पोस्टों पर टिप्पणियों के बढते हुए अकाल ने इन्हें एका कर एक-दूसरे का  हाथ थमने पर मजबूर कर दिया?… या फिर एक दूसरे को ‘समय आने पर देख लेने'...

हे प्रभु!…मुझे वर दे...मुझे वर दे...मुझे वर दे

हे प्रभु... ..  मुझे वर दे..मुझे वर दे...मुझे वर दे विनति तुझसे प्रभु है बस इतनी नहीं पसन्द मुझे दिखावा तू मुझे शील संयत संतुलित व्यवहार दे   नहीं चाहिए ‘जैम’ ‘बर्गर’ औ ‘पिज़्ज़ा’ मुझे तू मुझे पानीपत का ‘पचरंगा’ अचार दे नहीं पसंद सिक्कों की खनकार मुझे तू मुझे हरे नोटों का बस हार दे   मुझे धन दे  मुझे मोटर कार दे नहीं प्यारी ‘सैंत्रो’ ‘आई टैन’ मुझे तू बस मुझे 'वैगन ऑर' दे एक नहीं हाँ!.. दो-चार दे   बीवी चाहिए नायिका  सी ..नहीं कोई बेकार दे...
 
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