अरे!…कोई समझाओ ना इन हिन्दी ब्लोगरों को- राजीव तनेजा

      अरे!…कोई समझाओ यार इन हिन्दी ब्लोगरों को…सैन्टुआ गए हैं ससुरे सब के सब…गए थे राम भजन को ओटने लगे कपास… इसे कहते हैं मति-मति का फेर होना… “अरे!..भईय्यी जिस काम से गए थे…उसी को करो ना ठीक से…. ये क्या कि वहाँ की मच्छी मार्का धरती पसंद आ गयी तो वहीँ बसने की सोच ली?”.. “आप तो ऐसे ना थे"…. “क्या कहा?…वापिस नहीं लौटोगे?”.. “ये तो कोई बात नहीं हुई कि वापिस नहीं लौटोगे….कल को तुम्हें ऐश्वर्या या फिर बिपाशा पसंद आ गयी तो क्या मैं उनके साथ पूरी जिंदगी तुम्हारी फोटो...

उफ्फ़!..तौबा ये वर्ल्ड कप- पहला अंतराष्ट्रीय हिन्दी ब्लोगर सम्मलेन बांगलादेश में(7)-राजीव तनेजा

उफ्फ़!…तौबा ये वर्ल्ड कप वाले भी ना बस…वर्ल्ड कप वाले ही हैं…तुरन्त अपनी फटफटी पे आ के कहने लगे मुझसे… “मान ना मान..मैं तेरा मेहमान”… मैंने पूछा उनसे कि… “भईय्या…वो कैसे?”… छूटते ही कहने लगे “पहले आप अपने ये शब्द वापिस लें"… मैंने कहा “कौन से?”… वो बोले… “हम अपने मुँह से कैसे कहें?”… मैंने कहा कि… “आपके मुँह में पान…गुटखा या फिर तम्बाकू है क्या?”… वो बोले “कतई नहीं…इनसे तो कैंसर होता है".. मैंने पूछा “फिर क्या दिक्कत है?”.. वो बोले.. “बोलने में ही तो दिक्कत है"… मैंने कहा “तो फिर लिख...

अंतिम चक्र-पहला हिन्दी ब्लोगर सम्मलेन बांगलादेश में(6)- राजीव तनेजा

अल्ले…अल्ले अंटल जी…ये क्या कल लहे हैं आप?…बांग्लादेश में हिन्दी ब्लोगरों का सम्मलेन होने जा रहा है ना कि कोई क्रिकेट मैच….जाईये!…जाईये अपने घल जा के चौक्के-छक्के मालिये…   अल्ले ओ पैलवान अंटल जी…आप क्या कल लहे हैं…आपका बी वहाँ पर कोई काम नहीं है…       अल्ले ओ मिच्छ यूनिवल्स की बच्ची…तेला बी वहाँ पे कोई काम नहीं है…जा..अपने घल जा के गुझिया-पकोडे बना…   अल्ले ओ जमूरी….तू क्या कल लही है यहाँ पे…तेला बी कोई काम नहीं है वहाँ बांगलादेश में…जा अपने घल जा...

तैयारियां पूर्ण- पहला अंतराष्ट्रीय हिन्दी ब्लोगर सम्मलेन बांग्लादेश में(5)- राजीव तनेजा

लो जी हो गई तैयारियां पूरी…पासपोर्ट रेडी और वीसा तैयार….ब्लोगर बांग्लादेश की मच्छी मार्का धरती पर कूच करने को तैयार… अरे!…अरे…रुको तो सही…इतनी जल्दी काहे को करते हो मेरे यार?…पहले ज़रा किसी पण्डित…मौलवी या फिर पादरी से शुभ लग्न व मुहूर्त तो निकलवा लो… क्यों भाई लोग?…क्या कहते हैं आप…मुहूर्त निकलवाना चाहिए या नहीं?…. अच्छा!…ओ.के….चलिए मान लेते हैं आपकी बात कि शुभ मुहूर्त निकलवाना तो निहायत ही ज़रुरी है लेकिन यहीं से तो असली समस्या शुरू हो रही है जनाब कि  घूंघट के पट सबसे पहले कौन खोलेगा?….याने...

चार दिन की ब्लोगिंग के बाद टंकी पे चढ़े नज़र आओगे-पहला अंतराष्ट्रीय हिन्दी ब्लोगर महा सम्मलेन(4)-राजीव तनेजा

उफ्फ़!…तौबा…ये बच्चे भी ना…आफत हैं आफत….जैसे ही पता चला इनको कि हिन्दी ब्लोगरों का महा सम्मलेन होने जा रहा है बांग्लादेश में तो पड़ गए तुरंत मेरे पीछे कि “हम भी चलेंगे…हम भी चलेंगे” …. लाख समझाने की कोशिश की कि… “भईय्या मेरे…वहाँ पर हिन्दी ब्लोगिंग का परचम फहराने जा रहे हैं हम लोग कोई ट्वेंटी-ट्वेंटी के फिक्स्ड मैच खेलने नहीं कि तुम्हें भी अपने साथ ले चलें और फिर चलो खुदा ना खास्ता कैसे ना कैसे कर के ले भी गए तो वहाँ पर तुम्हारे पोतड़े कौन धोता और संभालता फिरेगा…अपने बस का तो है नहीं ये सब"… ...
 
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