अरे!…कोई समझाओ ना इन हिन्दी ब्लोगरों को- राजीव तनेजा
अरे!…कोई समझाओ यार इन हिन्दी ब्लोगरों को…सैन्टुआ गए हैं ससुरे सब के सब…गए थे राम भजन को ओटने लगे कपास… इसे कहते हैं मति-मति का फेर होना… “अरे!..भईय्यी जिस काम से गए थे…उसी को करो ना ठीक से…. ये क्या कि वहाँ की मच्छी मार्का धरती पसंद आ गयी तो वहीँ बसने की सोच ली?”.. “आप तो ऐसे ना थे"…. “क्या कहा?…वापिस नहीं लौटोगे?”.. “ये तो कोई बात नहीं हुई कि वापिस नहीं लौटोगे….कल को तुम्हें ऐश्वर्या या फिर बिपाशा पसंद आ गयी तो क्या मैं उनके साथ पूरी जिंदगी तुम्हारी फोटो...