फ़रेब का सफ़र - अभिलेख द्विवेदी

आजकल के इस आपाधापी भरे युग में कामयाब होने की ख़ातिर सब आँखें मूंद बढ़े चले जा रहे हैं। ऐसे समय में ना किसी को नैतिक मूल्यों की परवाह है ना ही इसकी कोई ज़रूरत समझी जा रही है। भविष्य की चिंता छोड़ महज़ आज को अच्छे से जीने की बात हो रही है। भले ही इसके लिए साम, दाम, दण्ड, भेद में से कुछ भी..किसी भी हद तक अपनाना पड़े या इसके लिए बेशक़ हमें, हमारे अपनों के प्रति ही भीतरघात करना पड़े या फ़िर फ़रेब का सहारा लेना पड़े। असली मकसद बस यही है कि कैसे भी कर सफ़लता हाथ लगनी चाहिए। दोस्तों, आज मैं ऐसे ही फ़रेबी विषय...

मोमीना - गोविन्द वर्मा सिराज

भारत पर मुग़लों ने लगभग 800 वर्ष और अँग्रेज़ों ने 200 वर्षों तक हुकूमत की। मगर मुग़लों के 800 सालों में कभी ऐसा नहीं हुआ कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच आपस में दंगे भड़क उठे हों जबकि अँग्रेज़ों ने लगातार हिंदुओं और मुसलमानों के बीच आपस में फूट डाल कर उन्हें इस कदर आपस में लड़वाया कि वे एक-दूसरे को अपनी कौम का दुश्मन समझने लगे..एक-दूसरे से नफ़रत करने लगे। आज़ादी के बाद अँग्रेज़ों के ही नक़्शेकदम पर चल भारतीय राजनीतिज्ञ भी हमारी आपसी फ़ूट एवं दुश्मनी को हवा दे अपना उल्लू सीधा करते रहे। दोस्तों..आज मैं हिंदू-मुस्लिम...
 
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