व्हाट ऐन आईडिया...सर जी
***राजीव तनेजा***
"हाँ!..तो शर्मा जी..आप चल रहे हैँ ना?"...
"कहाँ?"..
"हरिद्वार"...
"किसलिए?"...
"बस ऐसे ही!...एक छोटी सी ब्लॉगरज़ मीट रख रहे हैँ...अपना घूमना-फिरना भी हो जाएगा और साथ ही साथ हर की पौढी पे नहाती हुई षोडशी बालाओं को देख के कुछ साहित्य का चिंतन टाईप वगैरा हो जाएगा"
"आईडिया तो अच्छा है लेकिन इस सब के लिए इतनी दूर जाने की ज़रूरत ही क्या है?"...
"क्या मतलब?"...
"अपना यहीं पे... प्रेमबाड़ी वाली नहर पे चलते हैँ"...
"वहाँ किसलिए?"...
"वहाँ पर भी ऐसे मनोहारी एवं मनमोहक दृष्यों...