"बुरा दिन"

"बुरा दिन"***राजीव तनेजा***"मुँह में जो पानी ने आना शुरू किया तो फिर रुकने का नाम ही नहीं लिया""मेरी हालत देख बीवी से रहा ना गया....तुनक के बोली...."अभी तो सिर्फ शादी का न्योता भर ही आया है और तुम्हारा ये हाल हुए जा रहा है...."जब मौका आएगा तो कुछ'खान'पडेगा नहीं आपसे"मैँ बोला"अरी भागवान!....कभी तो अपनी चोंच बन्द किया करो...ये नहीं कि हर'टाईम'बस'बकर-बकर'.."ऊपरवाले ने अगर ज़बान दी है तो वो दी है...'तर'माल पाडने के लिए...."ये नहीं कि जब देखो करते जाओ ...बस'चबड-चबड'.....और कुछ नहीं"..."बिना आगा-पीछ सोचे...

"है बस यही अरमान"....

"है बस यही अरमान"...."देखा ना हाय रे!....सोचा ना हाय रे!....रख दी निशाने पे जानकदमों में तेरे....निकले मेरा दम...है बस यही अरम...

"नया मेहमान"

"नया मेहमान" ***राजीव तनेजा***"आजकल तबियत कुछ ठीक नहीं रहती थी....सो!...एक दिन'अपाइंटमैंट'ले'बीवी के साथ जा पहुँचा'डाक्टर'के पास" "इत्मीनान से चैक करने के बाद मुस्कुराते हुए'डाक्टर'साहब ने कहा..."बधाई हो!....'नया मेहमान'आने वाला है""खुशी से फूला नहीं समा रहा था मैँ"..."सीधा जा के बीवी को सारी बात बताई तो वो भी मुस्कुराते हुए बोली..."मै तो पहले ही कह रही थी"...."आप..माने तब ना"..."मम्मी भी कह रही थी कि अब पूरी सावधानी बरतनी होगी"..."ज़्यादा मेहनत मत करना"..."बस आराम करो"..."खूब खाओ-पिओ"..."और हाँ!....अब'ओवर्...

"आओ तौबा करें"

"आओ तौबा करें" ***राजीव तनेजा***"कभी सोचा भी ना था कि ऐसा होगा"..."इंसानियत का सरे बाज़ार'कत्लेआम'होगा"...."हम इंसान के बजाए शैतान बनते जा रहे हैं"..."कोई'शर्म-ओ-हया'बाकी नहीं रही अब"..."जब इनसान ही इनसान के साथ ऐसा बर्ताव करेगा तो फिर...उसमें और जानवर में क्या फर्क बाकी रहेगा?"..."किसी को अगर उसके किए की सज़ा देनी भी है तो ...उसकी कोई ना कोई'लिमिट'तो ज़रूर होनी चाहिए"..."ये नहीं की बदले की आग में हम इस कदर अन्धे हो जाएँ कि खुद को'भगवान'...'अल्लाह'...'यीशू'...समझने की गुस्ताखी कर बैठें""ऐसा बर्ताव...

"बिन् माँगे मोती मिले"

"बिन माँगे मोती मिले" ***राजीव तनेजा***"बात सर के ऊपर से निकले जा रही थी"...."कुछ समझ नहीं आ रहा था कि..."आखिर!...माजरा क्या है?".."जिस बीवी को मैँ फूटी आँख नहीं सुहाता था,वो ही मुझ पर मेहरबान हुए जा रही थी और...इस सब का कोई वाजिब कारण भी तो दिखाई नहीं दे रहा था""जो कल तक मुझे देख'नाक-भों'सिकोडा करती थी,...वही अब मौका देख मुझ से जाने-अनजाने लिपटने की कोशिश करती""मेरी पसन्द के पकवानों का तो मानो तांता लगा था"..."मेरी हर छोटी-बडी खुशी का ख्याल रखा जा रहा था""एक दिन आखिर सब राज़ खुल ही गया जब बीवी...'इठलाती'हुई...'बल खाती'हुई चली आयी और बडे ही प्यार से बोली..."जी!...इस बार'वैलैंटाईन'पर'गोवा'घुमाने ले चलो""मेरा माथा तो पहले से...

"लेडीज़ फर्स्ट"

"लेडीज़ फर्स्ट"***राजीव तनेजा***"आज घडी-घडी रह-रह कर दिल में ख्याल उमड रहा था कि.."जो कुछ हुआ....क्या वो सही हुआ?""अगर सही नहीं हुआ तो फिर...आखिर क्यूँ नहीँ हुआ?और...या फिर यही सही था तो फिर...ऐसा क्यूँ हुआ?""आखिर'ऊपरवाले'से मेरी क्या दुशमनी थी?"किस जन्म का बदला ले रहा था वो मुझसे?....जो उसने मुझे'लडका'बनाया"...."अगर लडकी बना देता तो...उसका क्या घिस जाता?""उसका तो कुछ बिगडा नहीं और मेरा कुछ रहा नहीं""तबाह करके रख दी मेरी पूरी ज़िन्दगी उसके इस लापरवाही भरे फैसले ने""अगर दुनिया में एक'लडका'कम हो जाता...या फिर...एक'लडकी'ज़्यादा हो जाती तो कौन सा'ज्वालामुखी'फूट पडता?""या कोई'ज़लज़ला'ही आ जाता?""तंग आ चुका था मैँ इस'लडके'के ठप्पे से"..."लगता...

"सजन रे बूट मत खोलो"

"सजन रे बूट मत खोलो"***राजीव तनेजा***"सजन रे'बूट'मत खोलो....अभी'बाज़ार'जाना है,ना'दालें'हैँ ना'सब्ज़ी'है ...अभी तो'राशन'लाना है""अरे ये क्या?"..."ये तो मै असली गीत गुनगुनाने के बजाए उसकी'पैरोडी'ही गाने लगा""असली गाना तो शायद कुछ अलग तरह से था ना?""अरे हाँ!..याद आया,वो तो इस तरह से था..."सजन रे'झूठ'मत बोलो,..'खुदा'के पास जाना है,ना'हाथी'है ,ना'घोडा'है...वहाँ तो बस'पैदलजाना है""वाह!..वाह..क्या गाना था...वाह!""गुज़रा ज़माना याद आ गया""कोई वक़्त होता था इस तरह के गानों का भी "'लेकिन'...'किंतु'...'परंतु'..अब तो'ज़माना'बदल गया है...'लोग'बदल गये है...शब्दों के'मतलब'बदल गए हैँ""सब'उल्टा-पुल्टा'हो गया है""पता नहीं ज़माना किधर का किधर जाए...

"आसमान से गिरा"

"आसमान से गिरा"***राजीव तनेजा***"हाँ आ जाओ बाहर..."..."कोई डर नहीं है अब"...."चले गये हैँ सब के सब""मैँ कंपकपाता हुआ आहिस्ता से'जीने'के नीचे बनी पुरानी कोठरी से बाहर निकला""एक तो....कम जगह...ऊपर से'सीलन'और'बदबू'भरा माहौल"..."रही-सही कसर इन कम्भख्त मारे चूहों ने पूरी कर दी थी""जीना दूभर हो गया था मेरा""पूरे दो दिन तक वहीं बन्द रहा मैँ"'ना खाना'.....'ना पीना'... ना ही कुछ और""डर के मारे बुरा हाल था""सब ज्यों का त्यों मेरी आँखो के सामने'सीन'दर'सीन'आता जा रहा था""मानों किसी फिल्म का'फ्लैश बैक'चल रहा हो जैसे""बीवी बिना रुके चिल्लाती चली जा रही थी...."अजी सुनते हो?"...."या आप भी'बहरे'हो चुके हो इन नालायकों की तरह?""सम्भालो अपने...

आदमी गर आदमी

"आदमी गर आदमी"***प्रभाकर***(मेरे अँकल द्वारा लिखी एक और गज़ल)आदमी गर आदमी को ही न जाने लगेखुदा की ज़ात को वो कैसे पहचाने लगेतेरी रहमत ने बदल डाले रुख रिन्दों के मयखाना छोड अब तो शिवाले जाने लगेखुदापरस्त, राजा-रंक में फर्क क्या जानेसोना मिट्टी समझ,मिट्टी में ही मिलाने लगेखुमारी-ए-खुदा की में हुए मदहोश इस कदरकि बेखबरी में हम सब कुछ लुटाने लगेन नहा सके तेरी चाँदनी में हम एक बारइस ख्याल से अब हम घबराने लगेगिला ना शिकवा है किसी से अब'प्रभाकर'कि हर बशर में नज़र खुदा अब आने लगे रिन्द=गुनाहगार, रहमत=कृपामयखाना=शराबखाना, खुदापरस्त=ईश्वर को चाहने वालेबशर=व्यक...

बोया पेड़ बबूल का- राजीव तनेजा

 चेहरा उदास हो चला था मेरा…माथे से  पसीना रुकने का नाम नहीं ले रहा था…कंपकपाते हुए हाथों से फोन को वापिस रख मैँ निढाल हो वहीं सोफे पे धम्म जा गिरा|सोच-सोच के परेशान हुए जा रहा था कि..क्या होगा?….कैसे होगा?…कैसे मैनेज करुंगा सब का सब? कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि क्या किया जाए? और कैसे किया जाए? बार-बार ऊपरवाले को याद कर यही प्रार्थना किए जा रहा था कि… “काश!…ये होनी टल जाए किसी तरह|उनका आना कैंसल करवा दे भगवान|इक्यावन!… पूरे इक्यावन रुपए का प्रसाद चढाउंगा” सच ही तो कहा है किसी...

"मेरे ख्यालों में"

"मेरे ख्यालों में"***प्रभाकर***(मेरे अंकल द्वारा लिखी हुई एक गज़ल)मेरे ख्यालों को बुलन्द परवाज़ दे एहतिरामे ज़ुबाँ हो वह अलफाज़ देमेरे तसव्वुर में बस उभरे तेरी तसवीरमेरी ज़ुबाँ पे बस तू अपनी आवाज़ देमेरा वजूद तेरे वजूद से है कायममुझे अपनी रहमत से तू नवाज़ देतेरी जल्व:गरी का रहा मुन्तज़र"प्रभाकर"मेरी तलाश को अब तू नवाज़ देतारीक-ए-जहालत में गुज़रे क्योंकरमेरे हाथों में अब इल्मे-चिराग देजो पेड ना दे साया मुसाफिर कोतू कैसे उसे उम्र दराज़ देबुलन्द= ऊँची , परवाज़=उडानअलफाज़=शब्द , तसव्वुर=ख्यालजल्व:गरी=दीदार , एहतिराम-इज्जत द...

सांता ज़रूर आएगा"

"सांता ज़रूर आएगा"***राजीव तनेजा***"यूँ तो अभी भी कुछ महीने बाकि थे'बडा दिन'आने में लेकिन...बच्चे तो बच्चे होते है...."उनके लिए क्या आज और क्या कल?""स्कूल की डायरी में क्या पढ लिया कि.... तीन महीने बाद'बडे दिन'की छुट्टियाँ आने वाली हैँ,सो ....अभी से चहकना चालू हो गया उनका कि...."सांता क्लाज़ आएगा"...."सांता क्लाज़ आएगा"...और..."नए-नए तोहफे लायेगा""उन बेचारों को क्या मालुम कि'ग़िफ्ट'तो हर साल चुपके से तकिए के नीचे उनके'मामू'ही रख जाते थे हमेशा""वो मासूम तो यही समझते कि ये सब'सांता'करता है"...सो...उसी का गुणगान करते नहीं थकते थे""मैँ इसी उधेड्बुन में फंसा था कि कैसे समझाऊँ बच्चों को कि....इस बार कोई'सांता'नहीं आने वाला""वजह!..उनका...
 
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