एक बेचारा
***राजीव तनेजा*** "बधाई हो तनेजा जी...सुना है कि आपको रौद्र रस के प्रख्यात कवि श्री गुस्सेश्वर सिंह धन..धनाधन द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार मिला है"... "जी हाँ!...सही सुना है और वो भी किसी छोटी-मोटी हस्ती के हाथों नहीं बल्कि चिर कुँवारी...'श्रीमति क्रुद्ध कुमारी' के हाथों"मैँ गर्व से अपनी छाती फुलाता हुआ बोला... "चिर कुँवारी...और श्रीमति?...मैँ कुछ समझा नहीं"... "पागल की बच्ची!...'गर्मागर्म 'मल्लिका' के ज़माने में भी ठण्डी 'श्रीदेवी' की फैन है"... "तो?"......